ओडिशा में एक और क्षेत्रीय दल गठन के संकेत 

ओडिशा में एक और क्षेत्रीय दल गठन के संकेत 

सतीश शर्मा (उप संपादक) 

ओडिशा की राजनीति में एक नए क्षेत्रीय राजनीतिक दल के उभरने को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

यह चर्चा ऐसे समय में सामने आई है, जब कभी राज्य की राजनीति पर लंबे समय तक वर्चस्व रखने वाली बीजू जनता दल (बीजद) गहरे अस्तित्वगत संकट से गुजरती दिखाई दे रही है। वर्ष 2024 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों में करारी हार तथा इसके बाद नुआपड़ा विधानसभा उपचुनाव में खराब प्रदर्शन ने बीजद के पुनरुत्थान की संभावनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नुआपड़ा उपचुनाव में बीजद का सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के पीछे तीसरे स्थान पर खिसक जाने ने
बीजद के संगठनात्मक ढांचे को गहरा झटका दिया है। आमतौर पर उपचुनावों को सरकार के प्रति जनभावना का संकेतक माना जाता है और इस परिणाम ने जमीनी स्तर पर पार्टी की स्थिति और कमजोर हुई है, जहां पंचायत और प्रखंड स्तर के प्रतिनिधि भाजपा-नीत राज्य सरकार के तहत प्रभावी ढंग से काम करने में असहज महसूस कर रहे हैं। इसी बीच भाजपा में दलबदल की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे यह धारणा मजबूत हुई है कि बीजद का दीर्घकालिक राजनीतिक वर्चस्व अब निर्णायक रूप से टूट चुका है।

इसी पृष्ठभूमि में एक नए क्षेत्रीय राजनीतिक मंच की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। कांग्रेस से निष्कासित पूर्व विधायक मोहम्मद मोक़ीम ने नए क्षेत्रीय दल के गठन के स्पष्ट संकेत दिए हैं। उनकी बीजद
के संस्थापक नेताओं में शामिल रहे बिजय महापात्र तथा विभिन्न जिलों कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं के साथ  बैठकों से हुई। भले ही अब तक किसी औपचारिक राजनीतिक गठन की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इन मुलाकातों ने राजनीतिक गलियारों में कयासों को हवा दी है। ऐसी चर्चाएं तेज हो रही हैं कि इस वर्ष एक नए क्षेत्रीय राजनीतिक दल का गठन हो सकता है। 
मोक़ीम ने इस संवाददाता से बात करते हुए कहा कि "ओडिशा में एक राजनीतिक शून्यता बन गई है, जिसे भरने के लिए युवा और छात्र वर्ग को आगे लाया जाएगा।"
मोक़ीम ने बताया कि जनवरी माह से पार्टी के गठन की ज़मीनी तैयारी शुरू की जाएगी। इसके तहत युवाओं और छात्र संगठनों की बैठकें आयोजित कर शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा। प्रस्तावित क्षेत्रीय दल का उद्देश्य भाजपा, बीजद और कांग्रेस के वर्चस्व को चुनौती देना है।
नए दल की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए मोक़ीम ने कहा कि दल युवा सशक्तिकरण और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जायेगी। इसके साथ राज्य में पूर्ण नशाबंदी को प्रमुख एजेंडा बनाया जाएगा। । उन्होंने कहा कि पार्टी शराबबंदी आंदोलन से जुड़े लोगों को साथ लेकर चलेगी। नशाबंदी से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई खनन क्षेत्र को मज़बूत कर की जा सकती है। उन्होंने मुफ्त योजनाओं की राजनीति को खारिज करते हुए रोजगारपरक और आत्मनिर्भरता पर आधारित नीतियों को प्राथमिकता देने की बात कही।
उन्होंने भाजपा पर सुशासन देने में विफल रहने का आरोप लगाया और कहा कि जनता बीजद और कांग्रेस को पहले ही परख चुकी है, अब उसे एक विश्वसनीय विकल्प की तलाश है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि हाल के दिनों में विभिन्न दलों के कई वरिष्ठ नेताओं से उनकी बंद कमरे में बैठकें हुई हैं। कई नेता अपने-अपने दलों में उपेक्षित महसूस कर रहे हैं और नए राजनीतिक मंच को लेकर उत्साहित हैं। नए दल की रूपरेखा पहले ही तैयार की जा चुकी है।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेतृत्व की खुलेआम आलोचना के बाद मोक़ीम को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने राज्यभर का दौरा कर विभिन्न दलों के नेताओं से मुलाकात की, जिससे नए दल को लेकर अटकलें तेज़ हो गईं। कटक में लगाए गए नववर्ष शुभकामना बैनरों में कांग्रेस के किसी भी चिन्ह या नेता की तस्वीर का न होना भी उनके राजनीतिक अलगाव की ओर संकेत माना जा रहा है।
यदि यह नया क्षेत्रीय दल अस्तित्व में आता है, तो ओडिशा की राजनीति में खासकर युवा सशक्तिकरण और नशाबंदी जैसे मुद्दों पर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।